Saturday, 3 December 2016

हैपीनेस एंड सक्सेस

आज हम आपके साथ मेंटल सैटिसफैक्शन के बारे कुछ चीजे शेयर करेंगे ।

लाइफ मे हमे खुद को खुश और संतुष्ट रखने का सबसे बेहतर फॉर्मूला ढूंढते रहते है लेकिन प्रोब्लेम हमारे पास ये होती है की हम अपने खुशी का रिमोट किसी और के हाँथ मे दिए होते हैं मतलब की हम खुश नही है क्योंकि उसने अच्छा काम नही किया। हम खुश नही हैं क्योंकि हमे अच्छी चटनी खाने को नही मिली । हम खुश नही है क्योंकि हमारा साथी हमारा मदद नही कर रहा है

हमे कई दफा लेने से पहले देना पड़ेगा क्योंकि नेचर प्री- पेड सर्विस पर विश्वास करती है जैसा की रिचर्ड टेम्पलर अपनी किताब मे लिखा है कि जिंदगी मूल्य चुकाने के बाद ही हमे कुछ देती है अगर हमे किसी से कोई समस्या हो रही है तो इसका सीधा सा मतलब है कि उसको भी हमसे कहीं न कहीं न कोई प्रोब्लेम है
इसका विश्लेषण करने की जरूरत है

साहब आप अगर किसी को अच्छा फील कराते हैं तो नेचर के गणित के हिसाब से आपको अच्छा फील होना ही है

अगर आप अपनी खुशी को दूसरे के हवाले, मौसम के हवाले, परिस्थिति के हवाले, बहानो के हवाले करते हैं तो मैं लिख कर दे सकता हूँ कि आप खुश कभी नही हो सकते है आप तभी हो सकेंगे जब आप इसे फील करेंगे।

जैसे आप किसी को पैसा कब दे पाएंगे ? शायद तब जब आपके पास होगा।
तो सोचिये की आप किसी को कैसे खुशी, प्यार दे सकते है जब तक आपके पास खुद ही नही है।

ये पोस्ट मैं अभी इसलिए लिखा है क्योंकि हमारा मेंटल सैटिस्फैक्शन बहुत जरूरी है

अभी कुछ सेकंड पहले मैं अपने बहुत अच्छे क्लाइंट से मिलकर आया और उनका व्यवहार हमारे दिल मे उतर गया। उन्होंने हमे एक्सप्रेस का मौका दिया और फील कराया की हम इम्पोर्टेन्ट है और आते हम और हमारे फ्रेंड को चॉकलेट गिफ्ट किया। हालांकि उन्होंने हमारा ज्यादा समान नही लिया लेकिन फील हैपीनेस कराया।
जब हमने उनसे पूंछा की सर आप ऐसा कैसे कर लेते है इससे तो आपका नुकसान हो जाता है
उनके जवाब ने हमे अवाक कर दिया।
उन्होंने कहा,"दोस्त मैं बिजनेसमैन हु और जनता हु कि इस दुनिया मे बिना इन्वेस्ट किये कुछ नही मिलता है मैं खुशियाँ इन्वेस्ट कर रहा हूँ इसलिए  खुशियाँ कई गुना हर रोज मुझे   मिल रही है जो इन सब से बहुत ज्यादा है"

इन बातों के हमारा सारा प्रोडक्ट बौना ही गया था क्योंकि इस इंसान के पास कोई प्रोब्लेम आ ही नही सकती है इनके लिए हर रोज पता नही कितनी दुआएं हो जाती है

आप लोगों को  क्या देते है या क्या लेते है यह सबकुछ भूला दिया जायेगा लेकिन आपने उन्हें क्या फील कराया था यह हमेशा याद रखा जाता है

सवाल ये है कि आज हम अपनी खुशी के लिए कितना इन्वेस्ट कर रहे है?
कितने लोगों को हम हैप्पीनेस फील करा रहे हैं?
कितने लोगों के जिंदगी मे गं सकरात्मक परिवर्तन ला पा रहें है?

यह पोस्ट हमारे विजन से थोड़ा अलग है लेकिन हम ये भी ढूंढना चाहते है कि हम कितने खुश हैं

*तो शुरुआत करिये*
*Just begin Now*

साहब आप सबने इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ा है तो हम आपकी प्रतिक्रिया जरूर चाहते है।

शुक्रिया


Abhishek Tiwari

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